भुजंगासन करने का तरीका और इसके फायदे :- Bhujangasana

भुजंगासन करने का तरीका और इसके फायदे :- Bhujangasana


नमस्कार दोस्तों

दोस्तों आज हम आपको बताने वाले भुजंगासन करने का तरीका और इसके फायदे।  भुजंगासन  शब्द के नाम (भुजंग ) से पड़ा है जिसका अर्थ होता है साँप।  दोस्तों भुजंगासन जब कोई करता है तो ऐसा लगता है जैसे कोई फन उठाए हुएँ साँप की भाँति प्रतीत होता है। भुजंगासन एक बहुत ही महत्वपूर्ण आसन है। जो हमारे शरीर के लिए काफी लाभदायक है। यह आसन कमर और छाती को लचीला बनाती है तथा शरीर के तनाव को दूर करता है।
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भुजंगासन करने का तरीका :-


1  सबसे पहले आपको भुजंगासन आसन करने के लिए जमींन पर एक मेट या चटाई बिछा ले।

२ उल्टा लेट कर पैर एकदम सीधे रखें, पाँव और एड़ियों को भी एकसाथ रखें।

4 दोनों हाथ, दोनों कंधो के बराबर नीचें रखे तथा दोनों कोहनियों को शरीर के समानांतर रखे।

5 लम्बी सांस लेते हुए अपनी धड़ ,छाती और पेट को धीरे- धीरे ऊपर  उठाए।

6 अब शरीर का सहारा लेते हुए ऊपर उठे और कमर को पीछे की और खींचे।

7 ध्यान रखे दोनों हाथों पर एक सामान भार डालें।

8 ठीक इसी प्रकार इस आसन को आप एक बार में 30 से 40 सेकेंड कर सकते है।

9 इस आसन को आप एक दिन में सुबह और श्याम कर सकते है पर ध्यान रहे भोजन करने से पहले
या भोजन करने के 3 घण्टे बाद करे।

भुजंगासन करने के फायदे :-


 1  भुजंगासन कंधे और गर्दन के तनाव से मुक्त करता है।

 2  भुजंगासन पेट की पाचन क्रिया को मज़बूत बनता है ।

 3  भुजंगासन संपूर्ण पीठ और कंधों को मजबूत बनता है।

 4  भुजंगासन रीढ़ की हड्डी का उपरवाला और मंझला हिस्सा ज़्यादा लचीला बनता है ।

 5  भुजंगासन थकान और तनाव से मुक्ति दिलाता है।

 6  भुजंगासन अस्थमा तथा अन्य श्वास क्रिया में लाभदायक है।

भुजंगासन करते समय सावधानियाँ :-


1  हृदय रोगों के मरीजों यह आसन करने से परेशानी हो सकती है।

2  उच्च रक्तचाप से पीड़ित को यह आसन करने से परहेज रखे।

3  गर्भवती महिलाएँ धनुरासन का अभ्यास ना करें।

4  अगर आप हॉर्निया, अल्सर, कोलाइटिस एवं पेट की किसी भी बीमारी से पीड़ित हैं तो इस आसन को न करें।

5  भोजन करने के कम से कम दो घंटे तक इस आसन को न करें।

6  यदि आप लंबे समय से बीमार हों या रीढ़ की हड्डी के विकार से ग्रस्त रह चुके हो तो इस आसन को न करें।

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