भ्रामरी प्राणायाम (Bhramari Pranayama) करने का तरीका और इसके फ़ायदे :-

भ्रामरी प्राणायाम (Bhramari Pranayama)

नमस्कार दोस्तों
दोस्तों आज हम बात करने वाले है भ्रामरी प्राणायाम के बारे में जो एक बहुत ही महत्वपूर्ण प्राणायाम है। भ्रामरी प्राणायाम का नाम एक भ्रामरी मधुमखी के नाम से पड़ा है। अर्थात जब हम भ्रामरी प्राणायाम करते है तो एक मधुमखी के आवाज के जैसे कंपन या ध्वनि निकलती है।  यह प्राणायाम व्यक्ति के दिमाग़ और मन को शांत करने में अति-महत्वपूर्ण है। यह प्राणायम करने में बिलकुल आसान है जिसे हम आसानी से कही भी किसी जगह कर सकते है। भ्रामरी प्राणायाम करने से क्रोध, चिंता और निराशा पर काबू पा सकते है। 

image source;google


भ्रामरी प्राणायाम करने का तरीका :-

1.भ्रामरी प्राणायाम करने के लिए सबसे पहले किसी साफ सुथरी जगह का चयन करें ,और अपना आसान बिछा ले और पद्मासन अवस्था में बैठ जाए , और मन को शांत करते हुए सामान्य स्वास ले। 

2. अब अपने हाथों को बगल में फैला कर अपने कंधे के समानांतर लाए , और कोहनियों को मोड़ते हुए हाथों को अपने कान के पास लाए। 


3. इसके बाद अपने हाथों के दोनों अंगूठो से अपने दोनों कानो को बंद कर ले। 


4.  अब अपने हाथों की पहली ऊँगली को अपने माथे पर लगाए , तथा बाकि बची उंगलियों को अपनी आँखों पर लगाए।
5.  अब अपना मुह बिल्कुल बंद रखें और अपने नाक के माध्यम से सामान्य गति से सांस अंदर लें।  फिर नाक के माध्यम से ही मधु-मक्खी जैसी आवाज़ करते हुए सांस बाहर निकालें। 


6. इस प्राणायम का अभ्यास मुह को पूरी तरह से बंद कर के ही करना है।


7. स्वास को निकलते समय अगर ॐ नाम के उच्चारण किया जाए तो इसका लाभ और अधिक हो जाता है। 


8. इस प्राणयाम को लगातार 5 से 10 मिनट तक दोहराए।
 

भ्रामरी प्राणायाम करने के फ़ायदे :-

1. भ्रामरी प्राणायाम आपके क्रोध और चिंता को खत्म कर मन को शांत करता है।
2. इसके करने से मानसिक तनाव कम हो जाता है।
3. भ्रामरी प्राणायाम करने से साइनस के रोगी को मदद मिलती है।
4. गर्भवती महिलाओं के लिए भ्रामरी प्राणायाम वरदान का कार्य करता है।
5. भ्रामरी प्राणायम करने से सोच सकारात्मक होती है और सोचन शक्ति में सुधार आता है।
6. भय, अनिंद्रा, चिंता, गुस्सा, और दूसरे अभी प्रकार के मानसिक विकारों को दूर करने के लिए भ्रामरी प्राणायाम अति लाभकारक होता है।
7. भ्रामरी प्राणायाम करने से मस्तिक्ष साफ़ होता है।
8. भ्रामरी प्राणायाम थायराइड से ग्रसित रोगियों के लिए राम बाण ईलाज का कार्य करता है।





भ्रामरी प्राणायम करते समय सावधानियाँ :-


1. भ्रामरी प्राणायाम हमेशा सुबह के वक्त और खाली पेट करना चाहिए।
2. अगर आप भ्रामरी प्राणायाम शाम के वक्त कर रहे हैं तो प्राणायाम करने और शाम का भोजन लेने के समय के बीच कम से कम दो से तीन घंटे का अंतर ज़रूर रखे।
3. कान में दर्द या किसी भी प्रकार के संक्रमण की शिकायत वाले व्यक्ति को भ्रामरी प्राणायाम नहीं करना चाहिए।
4. अगर भ्रामरी प्राणायाम करने पर ख़ासी आने लगे, सिरदर्द होने लगे, चक्कर आने लगे या किसी भी अन्य प्रकार की परेशानी होने लगे तो भ्रामरी प्राणायाम न करें।

Comments