नाड़ी शोधन प्राणायाम ( Nadi Sodhan Prananyam )

नाड़ी शोधन प्राणायाम  ( Nadi Sodhan Prananyam ) 


नमस्कार दोस्तों

दोस्तों आज हम बात करने वाले है नाड़ी शोधन प्राणायाम के बारे में की नाड़ी शोधन प्राणायाम क्या है, इसको करने का तरीका क्या है ,और इसके लाभ क्या है । यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण प्राणायाम है।  नाड़ी शोधन प्राणायाम नाड़ी का अर्थ होता है ' मार्ग '  या  ' शक्ति का प्रवाह ' और शोधन का अर्थ होता है शुद्ध करना। नाड़ी शोधन का अर्थ होता है नाड़ियों का शुद्धिकरण करना। नाड़ी शोधन मस्तिक्ष को साफ करता है और मन को शांत करता है।  नाड़ी शोधन प्राणायाम करने से चिंता ,तनाव ,अनिद्रा के मुक्ति मिलती है। यह प्राणायाम करने में बहुत ही आसान है। जिसे हम कभी भी किसी वक्त कर सकते है।

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प्राणायाम करने का तरीका :-

1. नाड़ी शोधन प्राणायाम करने के लिए सबसे पहले साफ़ सुथरी जगह का चयन करें और अपना आसन लगाए।
2. अब पद्मासन अवस्था में बैठ जाए। और स्वास को सामान्य रखें।
3. अब दाहिने हाथ को अपने मुँह के सामने ले जाए और अपने हाथ की तर्जनी ऊँगली और बिच की ऊँगली को अपने माथे पर रखें।
4. अपने अँगूठे से अपने दाहिने नासिकाछिद्र को दबाए तथा अनामिका से अपनी बाए नासिकाछिद्र के ऊपर रखें। अब दोनों ( अँगूठे और अनामिका ) से बारी बारी दबाए और स्वसन प्रिक्रिया करें।
5. पहले एक नासिकाछिद्र को दबाकर दूसरे नासिकाछिद्र से स्वास ले और फिर इसी प्रकार इसका उल्टा करें।
6. कनिष्ठा ऊँगली को अंदर की तरफ दबा क्र रहें।
7. इस अभ्यास को करते समय कमर को सीधा रखें।
8. इस अभ्यास को आप लगभग 30 मिनट तक कर सकते है।

नाड़ी शोधन प्राणायाम करने के फ़ायदे  :-


1. नाड़ी शोधन प्राणायाम करने से मस्तिक्ष के कार्य करने की समता बढ़ती है।
2. नाड़ी शोधन प्राणायाम करने से शरीर के विषेले तत्व बहार निकलते है
3. नाड़ी शोधन प्राणायाम करने से रक्त का शुद्धिकरण होता है।
4. श्वसन प्रिक्रिया में सुधार आता है।
5. इसे करने से तनाव,चिंता , अनिद्रा से मुक्ति मिलती है।

नाड़ी शोधन प्राणायम करते समय सावधानियाँ :-

1. नाड़ी शोधन प्राणायम करते समय मुँह से स्वास न ले।
2. स्वास लेते और छोड़ते समय ज्यादा जोर न लगाए।
3. अगर आपको किसी प्रकार की समस्या है तो इस प्राणायाम को न करे।
4. खाना खाने के 2 या 3 घण्टे बाद इस प्राणायम करें।

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