नटराजासन (Natarajasan)करने का तरीका और फ़ायदे

नटराजासन (Natarajasan)


नमस्कार दोस्तों

दोस्तों आज हम बात करने वाले है नटराजासन के बारे में की ये क्या हो और इसके क्या क्या फ़ायदे है, नटराजासन एक बहुत ही महत्वपूर्ण आसन है। इस आसन को यह नाम इसलिए दिया गया है क्योकि 'नटराज' भगवान शंकर का नर्तक रूप को कहा गया है। जिसमें आपकी रीढ़, पैरों और कूल्हों में लचीलेपन की आवश्यकता होती है। यह आपकी शारीरक समता को मजबूत बनाने में मदद करता है और आपके मस्तिक्ष और शरीर को खोलता है। जिससे आपके शरीर को आकर्षक आकृति और शक्ति मिलती है। इससे शरीर की संतुलन बनाने की समता में सुधार आता है। आइए अब हम जानते है इसके लाभ और इसको करने का तरीका :-
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नटराजासन करने का तरीका :-

1. नटराज आसन करने के लिए सबसे पहले साफ़ सुथरी जगह का चयन करें और अपना योगा मैट बिछाए। 
2. और ताड़ासन की अवस्था में खड़े हो जाए।
3. साँस को अंदर लेते हुए अपने बाएं पैर को पीछे की ओर घुटनों से मोड़ें और अपने बाएं हाथ से उसके अंगूठे को पकड़ लें।
4. पकड़े हुए पैर को अपनी समता के अनुसार जितना हो सके ऊपर उठाए।
5. अब अपने शरीर के ऊपर के हिस्से को आगे की ओर झुकाएं। और पुरे शरीर का वजन आपके दाए पैर पर हो।
6. इस मुद्रा को लगभग 15 से 30 सेकंड तक कर रखें और फिर दूसरे पैर से दोहराएं।

नटराजासन के फ़ायदे :-


1. नटराजासन करने से शरीर का वजन कम होता है।
2. शारीरिक संतुलन बनाने में मदद करता है।
3. शरीर को लचीला बनाने में मदद करता है।
4. शारीरिक तनाव को दूर करता है।
5. यह कंधे और मस्तिष्क में कैल्शियम के जमाव को रोकता है।


नटराजासन करते समय सावधानियाँ :-


1. कमर दर्द से पीड़ित व्यक्ति इसे न करे।
2. गर्बवती महिला इस योग का प्रयोग न करे।
3. रक्त चाप से पीड़ित इस आसन से परहेज न करे।
4. इस आसन को आप किसी योगा प्रशिक्षक की सामने करें।

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